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"""उदय प्रकाश के बारे में यह कहना काफी नहीं है कि वे हमारे समय के सबसे अच्छे युवा कहानीकार हैं, बल्कि सच यह है कि उन्होंने सम्पूर्ण हिन्दी कहानी के परिदृश्य में अपने लिए मुकम्मल जगह बना ली है। जब-जब लोग प्रेमचन्द, अमरकान्त, रेणु और रामनारायण शुक्ल आदि को याद करेंगे, तब-तब उदय प्रकाश का उल्लेख भी आयेगा। उनका यह कहानी-संग्रह इस बात की पुष्टि करता है। उदय प्रकाश ने अपनी इन कहानियों में औपन्यासिक विज़न के साथ इस 'असहनीय' यथार्थ को प्रस्तुत किया है। इन कहानियों में अद्भुत किस्सागोई है लेकिन मज़े लेकर वर्णन करने का अभाव है। इनमें हमारे समाज की भर्त्सना भी है और उसकी करुण गाथा भी। ये कहानियाँ सधी और तनी हुई कविता भी हैं और ऐसी कहानियाँ भी, जो अपनी वस्तु ही नहीं, पूरी आन्तरिकता में भारतीय हैं। ये कहानियाँ विराट् फन्तासी भी हैं और निर्मम, वस्तुपरक बयान भी । संग्रह में तीन छोटी-छोटी ‘आत्मकथाएँ' हैं, जो अद्भुत रूप से काव्यात्मक हैं। ये कहानियाँ इस बात की याद दिलाती हैं कि हिन्दी कहानी के कोने-अंतरे अभी सूने हैं और उन्हें कोई काव्यात्मक दृष्टि ही भर सकती है। यह अचरज की बात नहीं है कि लगभग काव्यात्मक तनाव को बनाये रखकर लम्बी कहानियाँ लिखने वाले उदय प्रकाश ने एक 'आत्मकथा' - 'डिबिया' में इस बात को रेखांकित किया है कि लेखक उन लोगों का विश्वास अर्जित करने के लिए, जो हमेशा अविश्वास ही करेंगे, हर अनुभव का प्रमाण देने के लिए विवश नहीं है। एक कवि ही ऐसा कहने का साहस कर सकता है, जो कि उदय प्रकाश हैं। वह अकेले ऐसे कवि हैं, जिन्होंने कहानीकार के रूप में, अपने कवि से निरपेक्ष, अलग और स्वतन्त्र जगह बनाई है, लेकिन अपने कवि की कीमत पर नहीं । इन कहानियों ने संग्रह के रूप में आने से पहले ही समकालीन हिन्दी कहानी के परिदृश्य में सार्थक हस्तक्षेप किया है और अब ये अधिक गहरी और ज़िम्मेदार चर्चा की माँग करती हैं।” - विष्णु नागर"
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ISBN
9788181437143
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Publication Vani Prakashan
उदय प्रकाश (Uday Prakash)

उदय प्रकाश

उदय प्रकाश का जन्म 1952 में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के सीमान्त ज़िले अनूपपुर के छोटे से गाँव सीतापुर में हुआ। प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा गाँव और अनूपपुर में। विज्ञान में स्नातक तथा हिन्दी साहित्य में उत्तर-स्नातक, कप्तान अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा तथा सर हरिसिंह विश्वविद्यालय, सागर, मध्यप्रदेश। शोध तथा अध्यापन : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली। पूर्व प्राध्यापक जेएनयू तथा पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज़ सेंटर, इम्फाल, मणिपुर। टाइम्स रिसर्च फाउंडेशन, स्कूल ऑफ़ सोशल जर्नलिज़्म, नई दिल्ली तथा इंदिरा गांधी जन-जातीय राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक, मध्यप्रदेश में जन-संचार माध्यम एवं पत्रकारिता विभाग में प्राध्यापन तथा विभागाध्यक्ष। संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन में विशेष कर्तव्य अधिकारी। कार्लटन कॉलेज, मिनिसोटा, अमेरिका में विज़िटिंग स्कॉलर, जर्मनी, अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड, इटली, मॉरीशस आदि देशों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में व्याख्यान। ‘दिनमान’, ‘पूर्वग्रह’, ‘संडे मेल’, ‘एमिनेंस’ आदि पत्र-पत्रिकाओं में सम्पादन। दूरदर्शन के लिए टीवी धारावाहिकों का निर्देशन, निर्माण, शोध एवं लेखन। कई साहित्यकारों पर साहित्य अकादेमी तथा हिन्दी अकादेमी के लिए वृत्तचित्रों का निर्माण, निर्देशन।

प्रमुख कृतियाँ : ‘मोहन दास’, ‘पीली छतरी वाली लड़की’, ‘तिरिछ’, ‘वारेन हेस्टिंग्स का साँड़’, ‘और अंत में प्रार्थना’, ‘दरियाई घोड़ा’, ‘अरेबा-परेबा’, ‘मैंगोसिल’, ‘दत्तात्रेय के दुख’, ‘पॉल गोमरा का स्कूटर’ (कहानी-संग्रह)। ‘सुनो कारीगर’, ‘कबूतर-कबूतर’, ‘रात में हारमोनियम’, ‘अंबर में अबाबील’, ‘एक भाषा हुआ करती है’ (कविता-संग्रह)। अनुवाद : ‘कला अनुभव’, ‘इन्दे : रोम्यां रोलां की डायरी’, ‘अमृतसर इंदिरा गांधी की आखिरी लड़ाई’ के अतिरिक्त समय-समय पर विश्व के प्रमुख कवियों के अनुवाद।

पुरस्कार-सम्मान : ‘साहित्य अकादेमी’, ‘भारतभूषण अग्रवाल सम्मान’, ‘ओमप्रकाश सम्मान’, ‘सार्क राइटर्स सम्मान’, ‘कम्यूनल हार्मनी’, ‘सद्भावना’, ‘अन्तरराष्ट्रीय पुश्किन’, ‘पहल’, ‘मुक्तिबोध’, ‘प्रेमचन्द’, ‘वनमाली’, ‘कथाक्रम’, ‘द्विजदेव’ आदि सम्मान। अनुवादों के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार।

लगभग सभी भारतीय तथा विश्व की तमाम प्रमुख भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद तथा पुस्तकें प्रकाशित। सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन, पत्रकारिता, यात्राएँ।

ई-मेल : udayprakash05@gmail.com

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