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- April 17, 2026
हम भारत के लोग : संविधान की आत्मा की पुनर्खोज
वाणी प्रकाशन ग्रुप द्वारा प्रकाशित लेखक तरुणाभ खेतान और लेखिका सुरभि करवा की पुस्तक ‘हम भारत के लोग : भारतीय संविधान पर नौ निबन्ध’ भारतीय संविधान की मूल भावना, उसके नैतिक आधार और समकालीन भारतीय लोकतंत्र के ज्वलंत प्रश्नों पर गंभीर विचार प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक केवल संविधान की धाराओं का विश्लेषण नहीं करती, बल्कि नागरिकता, समानता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों की उस आत्मा को समझने का प्रयास करती है जो समय के साथ धुंधली पड़ती दिखाई देती है। प्रस्तुत पुस्तक की समीक्षा कुँवर प्रांजल सिंह द्वारा की गई है।
पुस्तक समीक्षा
तरुणाभ खेतान और सुरभि करवा (2025)। हम भारत के लोग : भारतीय संविधान और उससे जुड़े ज्वलंत सवालों को टटोलती एक विचारोत्तेजक किताब ।
नयी दिल्ली : वाणी प्रकाशन
मूल्य : 325
इस किताब की समीक्षा करने से पूर्व एक ऐसे उपन्यास को याद कर लेना ज़रूरी है जो संविधान के लागू होने के वर्ष में लिखा गया था; राजेंद्र यादव का ‘सारा आकाश’ । यह वही रचना है जिसने स्वतंत्रता के बाद भारतीय समाज की उस उलझन को शब्द दिए जहाँ व्यक्ति राजनीतिक
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- February 28, 2026
भाषा, ज्ञान, संस्कृति और समाज : चतुर्भुज संरचना का अलौकिक साम्राज्य
वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित लेखक अभय कुमार दुबे जी की पुस्तक ‘उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य : भाषा, ज्ञान और संस्कृति का अंतरण की अवधारणा' के माध्यम से औपनिवेशिक वर्चस्व के उन सूक्ष्म आयामों को उद्घाटित करती है, जो मन और भाषा पर अधिकार स्थापित करते हैं। समाज-विज्ञान की स्थापित धारणाओं को चुनौती देती यह कृति हमें अपनी बौद्धिक सीमाओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है। प्रस्तुत पुस्तक की समीक्षा कुँवर प्रांजल सिंह द्वारा की गई है।
अमीर ख़ुसरो द्वारा रचित प्रसिद्ध क़व्वाली “छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाय के” की इन पंक्तियों से इस समीक्षा की शुरुआत करने का मेरा उद्देश्य मात्र भावात्मक रोमांच उत्पन्न करना नहीं है। बल्कि यह उस बौद्धिक स्थिति की ओर संकेत है, जिसमें हम जैसे समाज विज्ञान के विद्यार्थी और अध्येता स्वयं को पाते हैं। हम जैसे समाज विज्ञान के अध्येता अपने समय, समाज, संस्कृति और सत्ता की जटिल संरचनाओं को समझने का दावा करते हैं। जिसका जुड़ाव हमारी छाप (पहचान) से है। हम सिद्धान्तों की रोशनी
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- February 09, 2026
क्रान्ति का सपना : नैतिक राजनीति, असहज लोकतन्त्र के बीच विरोधाभास
वाणी प्रकाशन ग्रुप द्वारा प्रकाशित लेखक बिमल प्रसाद एवं पूर्व प्रशासक एवं लेखिका सुजाता प्रसाद की पुस्तक ‘क्रान्ति का सपना’ (हिन्दी अनुवाद : आशुतोष भारद्वाज) जयप्रकाश नारायण के जीवन और विचारों के माध्यम से भारतीय लोकतन्त्र, समाजवाद और नैतिक राजनीति के अन्तर्विरोधों को सामने लाती है। यह पुस्तक केवल जीवनी नहीं, बल्कि भारतीय राजनीतिक चेतना का एक महत्त्वपूर्ण वैचारिक दस्तावेज़ है। प्रस्तुत पुस्तक की समीक्षा कुँवर प्रांजल सिंह द्वारा की गई है।
पुस्तक समीक्षा
क्रान्ति का सपना जयप्रकाश नारायण की जीवनी भर नहीं है; यह बीसवीं सदी के भारतीय राजनीतिक विवेक की आत्मकथा है जो सत्ता से दूरी बनाकर नैतिकता को राजनीति का केन्द्र बनाना चाहता था, लेकिन बार-बार इतिहास की कठोर संरचनाओं से टकराकर घायल हुआ । यह किताब जेपी को किसी महापुरुष की मूर्ति में बदलने के बजाय, उन्हें एक ऐसे मनुष्य के रूप में सामने रखती है जो लगातार असमंजस, आत्मसंघर्ष और वैचारिक बेचैनी से गुज़रता रहा। यही इस किताब की सबसे बड़ी शक्ति भी है और सबसे बड़ा जोखिम
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- January 06, 2026
वाणी समाज अध्ययन की सदी : उन्मोचन शृंखला
नया पड़ाव : पाँच नयी पुस्तकों का प्रकाशन
1. उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य — अभय कुमार दुबे
2. हन्ना आरेंट : हिंसा का स्थापत्य — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
3. भारतीय ज्ञान-परम्परा : सातत्य और संवर्धन — बलराम शुक्ल
4. भारत की सारस्वत साधना — राधावल्लभ त्रिपाठी
5. अनागत गांधी : बापू से वैश्विक संवाद — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
अनागत गांधी : बापू से वैश्विक संवाद
अम्बिकादत्त शर्मा
प्रोफ़ेसर अम्बिकादत्त शर्मा काशी की पाण्डित्य परम्परा और आचार्य कुल में दीक्षित दर्शनशास्त्री हैं। भारतीय तत्त्वविद्या, प्रमाणशास्त्र, भाषा-दर्शन एवं साभ्यतिक-सांस्कृतिक अध्ययन के परिपृच्छाधर्मी अध्येता के तौर पर उन्होंने बौद्ध प्रमाण दर्शन, बौद्ध प्रमाण मीमांसा, भारतीयता के सामासिक अर्थ-सन्दर्भ, भारतीय मानस का विऔपनिवेशीकरण और दार्शनिक समीक्षा का सत्याग्रह जैसी बहुमान्य रचनाएँ की हैं। उनके वैदुष्य को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा ‘रिसर्च एवार्ड’, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, मध्यप्रदेश द्वारा ‘नरेश मेहता स्मृति
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- January 06, 2026
वाणी समाज अध्ययन की सदी : उन्मोचन शृंखला
नया पड़ाव : पाँच नयी पुस्तकों का प्रकाशन
1. उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य — अभय कुमार दुबे
2. हन्ना आरेंट : हिंसा का स्थापत्य — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
3. भारतीय ज्ञान-परम्परा : सातत्य और संवर्धन — बलराम शुक्ल
4. भारत की सारस्वत साधना — राधावल्लभ त्रिपाठी
5. अनागत गांधी : बापू से वैश्विक संवाद — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
भारत की सारस्वत साधना
राधावल्लभ त्रिपाठी
राधावल्लभ त्रिपाठी : संस्कृत और हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार और प्रखर चिन्तक राधावल्लभ त्रिपाठी डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के संस्कृत विभाग में आचार्य रहे हैं। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान
के कुलपति और शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में फ़ेलो रहने के साथ-साथ उन्होंने भंडारकर प्राच्यविद्या संशोधन मंडल, पुणे में कर्नाटक प्राच्यविद्या पीठ पर दो वर्ष कार्य किया है। आचार्य त्रिपाठी को भारतीय दार्शनिक अनुसन्धान परिषद् की नैशनल फ़ेलोशिप भी मिल चुकी है। प्रचुर लेखन और वक्तृता के लिए विख्यात आचार्य त्रिपाठी के हिन्दी तथा
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- January 06, 2026
वाणी समाज अध्ययन की सदी : उन्मोचन शृंखला
नया पड़ाव : पाँच नयी पुस्तकों का प्रकाशन
1. उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य — अभय कुमार दुबे
2. हन्ना आरेंट : हिंसा का स्थापत्य — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
3. भारतीय ज्ञान-परम्परा : सातत्य और संवर्धन — बलराम शुक्ल
4. भारत की सारस्वत साधना — राधावल्लभ त्रिपाठी
5. अनागत गांधी : बापू से वैश्विक संवाद — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
भारतीय ज्ञान-परम्परा : सातत्य और संवर्धन
बलराम शुक्ल
बलराम शुक्ल : संस्कृत, फ़ारसी तथा हिन्दी के अध्येता डॉ. बलराम शुक्ल दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में प्रोफ़ेसर हैं। संस्कृत भाषा में उनके तीन कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं : परीवाह:, लघुसन्देशम् तथा कवितापुत्रिकाजातिः। फ़ारसी ग़ज़लों के दो संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं : इश्क़ो आतिश और ज़ाफ़रानो सन्दल। उन्होंने शतावधानिरचनासंचयनम् तथा पश्यन्ती नाम के संस्कृत कविता-संग्रहों का सम्पादन भी किया है। रूमी के काव्य का हिन्दी रूपान्तर निःशब्द नूपुर शीर्षक से प्रकाशित है। भाषा-विज्ञान तथा संस्कृत साहित्य सम्बन्धी विषयों
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- January 05, 2026
वाणी समाज अध्ययन की सदी : उन्मोचन शृंखला
नया पड़ाव : पाँच नयी पुस्तकों का प्रकाशन
1. उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य — अभय कुमार दुबे
2. हन्ना आरेंट : हिंसा का स्थापत्य — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
3. भारतीय ज्ञान-परम्परा : सातत्य और संवर्धन — बलराम शुक्ल
4. भारत की सारस्वत साधना — राधावल्लभ त्रिपाठी
5. अनागत गांधी : बापू से वैश्विक संवाद — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
हन्ना आरेंट : हिंसा का स्थापत्य
अम्बिकादत्त शर्मा
काशी की पाण्डित्य परम्परा और आचार्य कुल में दीक्षित दर्शनशास्त्री हैं। भारतीय तत्त्वविद्या, प्रमाणशास्त्र, भाषा-दर्शन एवं साभ्यतिक-सांस्कृतिक अध्ययन के परिपृच्छाधर्मी अध्येता के तौर पर उन्होंने बौद्ध प्रमाण दर्शन, बौद्ध प्रमाण मीमांसा, भारतीयता के सामासिक अर्थ-सन्दर्भ, भारतीय मानस का विऔपनिवेशीकरण और दार्शनिक समीक्षा का सत्याग्रह जैसी बहुमान्य रचनाएँ की हैं। उनके वैदुष्य को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा ‘रिसर्च एवार्ड’, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, मध्यप्रदेश द्वारा ‘नरेश मेहता स्मृति वाङ्मय सम्मान’, अखिल भारतीय दर्शन
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- January 05, 2026
वाणी समाज अध्ययन की सदी : उन्मोचन शृंखला
नया पड़ाव : पाँच नयी पुस्तकों का प्रकाशन
1. उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य — अभय कुमार दुबे
2. हन्ना आरेंट : हिंसा का स्थापत्य — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
3. भारतीय ज्ञान-परम्परा : सातत्य और संवर्धन — बलराम शुक्ल
4. भारत की सारस्वत साधना — राधावल्लभ त्रिपाठी
5. अनागत गांधी : बापू से वैश्विक संवाद — अम्बिकादत्त शर्मा, विश्वनाथ मिश्र
उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य
भाषा, ज्ञान और संस्कृति का अंतरण
अभय कुमार दुबे
उपनिवेशवाद की भाषाई विचारधारा के अध्येता अभय कुमार दुबे विमर्शी रचनाओं के अनुवादक-सम्पादक और मीडिया मंचों पर राजनीतिक विश्लेषक के रूप में भी विख्यात हैं। दिल्ली के अम्बेडकर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर और देशिक अभिलेख-अनुसन्धान केन्द्र के निदेशक बनने से पहले वे बीस वर्ष तक दिल्ली स्थित विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सेंटर फ़ार द स्टडी ऑ़फ डिवेलपिंग सोसाइटीज़) में प्रोफ़ेसर, अध्ययन पीठ के भारतीय भाषा कार्यक्रम के निदेशक और समाज-विज्ञान और मानविकी की पूर्व-समीक्षित पत्रिका प्रतिमान समय समाज संस्कृति के प्रधान
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- January 03, 2026
खड़ूस
अशोक मिश्रा के बारे में…
नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा, नयी दिल्ली के स्नातक (1982), पटकथा लेखक, गीतकार, अभिनेता, नाट्य निर्देशक।
‘भारत एक खोज’, ‘अमरावती की कथाएँ’, ‘मृग नयनी’, ‘सहर’, ‘संक्रांति’, ‘इन्तज़ार’ आदि धारावाहिकों का लेखन।
‘कटहल’, ‘वेलकम टू सज्जनपुर’, ‘वेल्डन अब्बा’, ‘नसीम’, ‘समर’, ‘बवंडर’, ‘कभी पास कभी फेल’, ‘दुर्गा’, ‘भैरवी’, जैसी चर्चित फ़िल्मों में पटकथा और गीत लेखन।
‘समर’ और ‘नसीम’ फ़िल्मों के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखन के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित।
‘वेलकम टू सज्जनपुर’ में सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन हेतु ‘स्टार स्क्रीन एवार्ड’। मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग का प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय किशोर कुमार एवार्ड’। हाल ही में उनकी लिखी फ़िल्म ‘कटहल—ए जेकफ़्रूट मिस्ट्री’ को सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फ़िल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उनके लिखे नाटक ‘बजे ढिंढोरा उर्फ़ ख़ून का रंग’, ‘गांधी चौक’, ‘अटके-भटके-लटके सुर’, ‘सड़क’, ‘पत्थर’ ,‘कचरे की हिफ़ाज़त’, ‘रास बिहारी टिकिट कलेक्टर’ और ‘माइंड ब्लोईंग मेनेक्विन’ काफ़ी खेले जाते हैं।
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- January 01, 2026
ग्रामकहानी
अविनाश कुमार के बारे में…
अविनाश कुमार का जन्म 14 सितम्बर
1998 को बिहार के अररिया ज़िले के बघुआ गाँव में हुआ।
उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता से बी.ई. (पावर इंजीनियरिंग) की डिग्री प्राप्त की है।
वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के ओडिशा कैडर के अधिकारी हैं।
उनकी कुछ कविताएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित हो चुकी हैं, जिससे उनके लेखन की प्रारम्भिक पहचान बनी। ‘ग्रामकहानी’ उनका पहला उपन्यास है।
पुस्तक अंश :
श्री शर्मा जी पूर्व की भाँति ही अपनी पत्रकारिता और शायरी में नित्य नये कीर्तिमान रचे जा रहे थे कि अचानक नियति ने करवट ली। इसकी वजह से शर्मा जी के जीवन में जो उथल-पुथल मची उसकी कल्पना बेचारे शर्मा जी ने सपने में भी नहीं की थी।
बकरे की अम्मा आख़िर कब तक ख़ैर मना पाती। सहकर्मियों ने शर्मा जी को नकारा, निकम्मा, आलसी, मन्दबुद्धि और कामचोर तो पहले से ही घोषित कर रखा था; बीते कुछ दिनों में हमारे शर्मा जी ‘नॉन-परफार्मिंग एसेट’ के रूप में भी प्रचलित कर दिये गये थे। कुप्रचार इस तरह फैल गया कि मैनेजमेंट को भी यह साफ़-साफ़ दिखने लगा कि शर्मा जी इस मीडिया कम्पनी
