Shairi Ke Naye Mode (Volume-2)

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शाइरी के नये मोड़ -

1935 से 1958 तक उर्दू शाइरी ने कई मोड़ लिये हैं। शाइरी के नये मोड़ के पाँच भागों में

इसी दौर के प्रतिष्ठित प्रगतिशील और प्रयोगवादी शाइरों के श्रेष्ठ कलाम और परिचय प्रस्तुत हैं : पहला मोड़ : इस भाग में 1946 से मार्च 1958 तक की उर्दू शाइरी की एक झलक, और मशहूर शाइरों की प्रतिनिधि रचनाओं का चयन है। दूसरा मोड़ : 1935 से अक्तूबर 1958 तक की उर्दू शाइरी पर नज़र और छह चुनिन्दा शाइरों के कलाम और जीवन-परिचय । तीसरा मोड़ : उर्दू के दो महान् उर्दू शाइरों : इसरारुलहक मजाज़ और फैज़ अहमद फ़ैज़ के श्रेष्ठतम कलाम और जीवन-परिचय । चौथा मोड़ : प्रमुख तरक़्क़ीपसन्द

शाइरों : अली सरदार जाफरी, जाँ निसार अख़्तर और साहिर लुधियानवी के परिचय और श्रेष्ठ कलाम । पाँचवाँ मोड़ : प्रख्यात आधुनिक उर्दू शाइरों : नरेश कुमार 'शाद', वामिक जौनपुरी, क़तील शिफाई और मजरूह सुलतानपुरी के परिचय और कलाम ।

उर्दू-साहित्य के प्रखर अध्येता और मनस्वी विचारक अयोध्याप्रसाद गोयलीय की इस ऐतिहासिक महत्त्व की पुस्तक का प्रस्तुत है नया संस्करण ।

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ISBN
9788126300259
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Publication Bharatiya Jnanpith
अयोध्या प्रसाद गोयलीय (Ayodhya Prasad Goyaliya )

"अयोध्याप्रसाद गोयलीय - उर्दू साहित्य के गम्भीर अध्येता और विद्वान। जन्म 1902 में बादशाहपुर, गुड़गाँव, हरियाणा में। उच्च शिक्षा के दौरान न्याय, व्याकरण और काव्य का अध्ययन। 1920 से 1940 तक दिल्ली में निवास और उसी अवधि में उर्दू साहित्य और इतिहास का गम्भीर अध्ययन। 1975 में सहारनपुर (उ.प्र.) में देहावसान। प्रमुख कृतियाँ हैं—'शेर-ओ-सुख़न' (5 भाग), 'शाइरी के नये दौर'(5 भाग), 'शाइरी के नये मोड़' (5 भाग), 'शेर ओ-शायरी', 'नग़्मए-हरम', 'गहरे पानी पैठ', 'जिन खोजा तिन पाइयाँ' आदि। "

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